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आरक्षण और वंचित समाज

   देश में जारी आरक्षण पर बहस के इस दौर में मैं आरक्षण विरोधियों से केवल इतना पूछना चाहता हूं कि इतने दिनों तक आरक्षण रहने के बावजूद भी शोषित, वंचित जातियों को आज तक उनका वाजिब प्रतिनिधित्व क्यों नहीं मिल पाया?? क्या कारण है कि राजा राममोहन राय के बाद आज तक किसी सवर्ण ने वंचितों और पिछड़ों के हितों की आवाज को नहीं उठाया?? आज जातिगत आरक्षण की बजाए गरीबी के आधार पर आरक्षण की मांग की जा रही है आखिर ऐसा क्यों?? जबकि सबको मालूम होना चाहिए कि आरक्षण गरीबी उन्मूलन का आधार नहीं है, आरक्षण शोषितों, वंचितों व पिछड़ों को समान प्रतिनिधित्व दिलाने के लिए लागू किया गया था क्योंकि सामाजिक विसंगतियों की वजह से बहुत सी जातियां समाज में आर्थिक, सामाजिक व शैक्षिक रूप से बहुत ही पिछड़ गई थी। एक सशक्त लोकतंत्र की नींव वहां के सभी वर्गों के आर्थिक, सामाजिक व शैक्षिक न्याय पर टिकी होती है।     हमारे देश की 85 प्रतिशत वंचित व पिछड़ी जातियों के पास देश की सरकारी नौकरियां में 20 परसेंट की भी हिस्सेदारी नहीं है, संविधान के लागू होने के लगभग 70 वर्षों बाद भी सरकारों ने इन जातियों के उत्थान ...

न्यायपालिका में परिवारवाद

(5 मिनट समय निकालकर जरूर पढ़ें)    जैसा कि हम सभी लोग जानते हैं कि हमारे देश में एक स्वतंत्र न्यायपालिका है, जिसकी व्यवस्था संविधान ने की है. परंतु क्या इसको एक स्वतंत्र व निष्पक्ष न्यायपालिका कहा जा सकता है, यह हमेशा से एक सवाल रहा है. जनसत्ता में छपी खबर के मुताबिक हाल ही में मुंबई के एक वकील मैथ्यूज जे नेदुमपारा ने National judicial appointment act को चुनौती देते हुए एक याचिका दायर की है, उन्होंने अपनी यह रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों की संवैधानिक पीठ को सौंपी है, नेदुमपारा ने कहा है कि कॉलेजियम व्यवस्था जिसमे एक जज दूसरे जज को नियुक्त करते हैं न्याय संगत नहीं है।   विदित हो कि 1990 के कुछ फैसलों से कॉलेजियम सिस्टम बना था. नेदुमपारा का दावा है कि उनका रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट व 13 हाईकोर्ट के 2014 तक के आंकड़ों पर आधारित है, उनका आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट बिना कोई भर्ती नोटिफिकेशन के ही जजों की नियुक्ति करता है जिसमें किसी जज, वकील या न्यायपालिका से जुड़े परिवार के व्यक्ति को ही तरजीह दी जाती है. मौजूदा समय में सुप्रीम कोर्ट के 31 जजों में 6 जज पूर्व जजों के बे...

अतीत

   अतीत    फरवरी का पहला सप्ताह...मेरे एक मित्र को एक ग्रीटिंग कार्ड की जरूरत थी शायद कोई खास छूट गया था, छोटे से कस्बे में बमुश्किल 5 या 6 दुकानों वाली बाजार में कही ग्रीटिंग कार्ड मिल नही रहा था सब कार्ड जनवरी तक खत्म हो चुके थे, मुश्किल से एक दुकान पर बचे कुछ कार्डों मे से एक कार्ड जो पसंद भी नही था लेना पड़ा मैं खरीदते वक्त अपने मित्र के साथ था मैंने पूछा इतनी क्या जरूरत है तो उसने कहा कि अगर नही मिलता तो बाहर से किसी भी तरह एक कार्ड मांगना पड़ता चलो मिल गया, बात एक कार्ड की नही है उस भावात्मक दोस्त की है जो एक कार्ड न पाने की वजह से नाराज हो गया था जो आज के मशीनी दौर में शायद देखने को मिले, आज मोबाइल का युग है हमने एसएमएस का दौर भी देखा है जो बहुत कम समय मे खत्म हो गया अब शायद ही कोई एसएमएस भेजता हो, ये केवल बैंकिंग व अन्य सूचनाओ तक ही सीमित रह गया है।    आज के स्मार्टफोन के दौर में मैंने नए साल की पहली सुबह को जब मोबाईल खोला तो मोबाइल पर शुभकामनाओ की बाढ़ सी आ गयी, कई संदेश सालो बात मिले शायद अगली न्यू ईयर के बाद इस बार भी न्यू ईयर पर ही आये थे, मैसेज कि...

अयोध्या विवाद और सुप्रीम कोर्ट का फैसला

   कल दिनांक 9 नवंबर 2019 को देश की सर्वोच्च अदालत ने लगभग 400 वर्षों से अधिक समय तक विवादित रहे राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद जमीन विवाद मामले में अपना फैसला सुनाते हुए यह आदेश दिया कि विवादित जमीन राम मंदिर निर्माण के लिए दी जाए व अयोध्या में 5 एकड़ जमीन मुस्लिमों को मस्जिद बनाने के लिए दी जाए इसी के साथ इस बहुत पुराने धार्मिक व ऐतिहासिक मुद्दे का लगभग-लगभग अंत हो गया। इससे पहले इस धार्मिक मुद्दे को लेकर हिंदू और मुस्लिमों के द्वारा राम और बाबर के नाम पर जो खूनी होली खेली गई थी उसको इतिहास कभी माफ नहीं करेगा, आखिर धर्म के नाम पर हिंसक होना व धर्म के लिए खून बहाना कहां तक किसी धर्म में जायज है जबकि सारे धर्म यही दावे कर रहे हैं की उनका धर्म शांति व मानवता का संदेश देता हैं लेकिन अयोध्या विवाद पर जो त्रासदी भारत में हुई उसे भारत समेत सारी दुनिया ने अपनी आँखों से देखा है फिलहाल अब सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद इस मामले का पटाक्षेप हो जाना निश्चित प्रतीत हो रहा है।     मैंने इतिहास में पढ़ा था कि इस मस्जिद को बाबर के दीवान मीर बाकी ने 1527 ई0 में बनवाया था लेकिन यह मस्जिद...

तुम कितने गांधी मारोगे...

    मैं जानता हूं कि मेरे इस शीर्षक में कुछ लोग गलत अर्थ खोजेंगे लेकिन अर्थ निकालते समय वो ये भूल जाएंगे कि चाकू अगर किसी की जान ले सकता है तो बचा भी सकता है बस उसका उपयोग कौन क...

बाबरी कश्मीर टू बेबस कश्मीर

    एक टीवी चैनल से बात करते हुए कश्मीरी सामाजिक कार्यकर्ता बाबर कादरी से जब ये पूछा गया कि आप अपने आप को हिन्दुस्तानी मानते है कि नही तो बाबर कादरी ने बड़ी सफाई से अपने आप को हिन्दुस्तानी मानने से इनकार कर दिया अब बात बाबर कादरी जैसे लोंगो के सोच की है कि ये लोग सामाजिक कार्यकर्ता है या कश्मीरी समाज को गर्त में ले जाना चाहते है आखिर बाबर कादरी जैसे सोच वाले लोग ही कश्मीर की जनता को दशकों से बहलाकर गलत रास्ते पर ले जाने को मजबूर कर रहे है, अनेक कश्मीरी राजनीतिक पार्टियां, सामाजिक कार्यकर्ता व अलगाववादी नेताओं द्वारा जो कश्मीर में सेना द्वारा आम जनता को परेशान करने व शोषण की बात कही जा रही है वो सरासर झूठ है हाँ ये बात जरूर है कि इतनी बड़ी संख्या में सेना व सशस्त्रबलों को सुरक्षा में लगाने से जरूर पब्लिक को कुछ न कुछ समस्याएं आ जाती होंगी लेकिन ये माहौल बनाया किसने है, कश्मीर का युवा रोजगार मांगता है तो आप उसको सेना पर पत्थर मारने का रोजगार देते हो और जब वो आपके द्वारा दिये गए रोजगार से हताहत होता है तो आप उसके लिए घड़ियाली आंसू बहाते हो आप के बच्चे विदेश में पढ़े ये आपका अधिकार ह...

बेचारा संसद

    पिछले कुछ सालों में धर्म के नाम पर ऐसी राजनीति कुछ पार्टियों द्वारा की गई जिससे हमारे देश की संविधान को गहरा आघात हुआ है जिसके परिणाम शायद अभी न निकले हो लेकिन आने वाले समय मे इसके भयानक परिणाम निकलने वाले है जिसका सामना करने के लिए हमको तैयार रहना होगा हालांकि हम अभी चिंतामुक्त होकर बैठे है वो भी क्यूं क्योंकि ये माहौल हमने ही बनाये है आज हमारे भारत मे वो सभी घटनाये घटित हो रही है जिसका एक सभ्य समाज कभी समर्थन नही करेगा, मैं कभी किसी धर्म के खिलाफ नही हूँ न ही किसी धर्म का आलोचक हूँ लेकिन मैं हर उस चीज का सख्त विरोधी हूँ जो देश के विकास व समाज की तरक्की में बाधक है, कल संसद में सांसदों के शपथ ग्रहण के दौरान जो कुछ भी हुआ वो एक ताकतवर व जिम्मेदार देश की संसद से तो कतई उम्मीद नही की जा सकती हमने संसद को धर्म संसद में तब्दील कर दिया आखिर किसी भी सांसद ने संसद में ये कहने की हिम्मत क्यों नही जुटाई की ये सब संसद में नही होना चाहिए संसद हमारा मंदिर है बेशक लेकिन अल्लाह हू अकबर, जय श्री राम व जय बांग्ला कहने के लिए नही संसद के मंदिर में समस्त देशवासियों के कल्याण की पूजा होनी च...